✨ होली 2026 ✨
राधा-कृष्ण का प्रेम, मिठास और… सुबह की वो कतार
📅 4 मार्च 2026 | होली विशेष
⏱ 5 मिनट का आध्यात्मिक सफर
🌸 आज वो पवित्र दिन है जब राधा और कृष्ण के प्रेम ने रंगों का रूप लिया था। आज वो अवसर है जब गले मिलते हैं, गिले-शिकवे भुलाए जाते हैं और घरों में मिठाइयाँ बनती हैं। लेकिन आज सुबह 5-6 बजे NCR में मैंने जो देखा, उसने सोचने पर मजबूर कर दिया।
🕊 सुबह 5 बजे की वो कतार
एनसीआर की एक साधारण सुबह होली की पहली किरण के साथ ही सड़कों पर सन्नाटा था, लेकिन एक जगह भीड़ थी – मीट की दुकान के बाहर। दर्जनों लोग, हाथ में थैले लिए, सुबह-सुबह कतार में खड़े थे। त्योहार की तैयारी? या कुछ और? ये वही लोग हैं जो शाम को रंगों से सराबोर होकर ‘होली है’ चिल्लाएंगे, लेकिन दिन की शुरुआत की प्राथमिकता क्या थी, ये साफ दिख रहा था।
🎶 राधे-कृष्ण की होली: प्रेम और मिठास
ब्रज की होली में गुलाल से ज्यादा प्रेम बरसता है। राधा और कृष्ण के इस पर्व में गुझिया, पेड़े, मालपुए की मिठास घर-घर बिखरती है। भगवान कृष्ण ने स्वयं इस दिन को प्रेम का प्रतीक बनाया। ये दिन है एक-दूसरे को मिठाई खिलाने का, न कि सुबह-सुबह मांस के लिए कतार में लगने का। कहीं न कहीं, हम प्रेम के इस पर्व को केवल भोग-विलास का पर्व बनाते जा रहे हैं।
🍬 “जहाँ प्रेम है, वहीं मिठास है। जहाँ मिठास है, वहीं कृष्ण हैं।” 🍬
📜 गरुड़ पुराण: कलियुग की पहचान
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि कलियुग में धर्म गौण हो जाएगा और इंद्रियों की तृप्ति प्रमुख हो जाएगी। लोग त्योहारों के आध्यात्मिक महत्व को भूलकर उन्हें केवल ‘खाने-पीने’ के दिन के रूप में मनाएंगे। आज सुबह की वो कतार उसी भविष्यवाणी का प्रत्यक्ष उदाहरण लगी। जहाँ पहले पूजा-पाठ और सत्संग से दिन की शुरुआत होती थी, वहीं आज पहली प्राथमिकता मांस की दुकान बन गई।
“युग धर्म: कलियुग में मनुष्य का मन भोग की ओर दौड़ेगा, धर्म पीछे रह जाएगा।”
🔍 सवाल वही है: कहाँ खो गया प्रेम और मिठास?
मैं ये नहीं कहता कि क्या खाना चाहिए या क्या नहीं। हर किसी की अपनी पसंद है। लेकिन सवाल ये है कि प्राथमिकता क्या है? आज का दिन राधा-कृष्ण के प्रेम का है, मिठाई बांटने का है, गले मिलने का है। जब त्योहार की पहली सुबह मीट की दुकान पर बीते, तो फिर प्रेम और मिठास के लिए समय कहाँ बचेगा? क्या यही कलियुग का लक्षण नहीं कि हम प्रतीकों को भूलकर पदार्थ की ओर भाग रहे हैं?
रंग बरसे, प्रेम बरसे, मिठास घुली रे,
क्यों सुबह-सुबह कतार लगी, ये कैसी होली रे?
राधा-कृष्ण की मुरली बोले, प्रेम ही त्योहार,
कलियुग की ये पहचान, बदले विचार हमार।
🌺 तो आज के दिन याद रखें
होली सिर्फ रंगों और भोजन का त्योहार नहीं है। ये प्रेम का विज्ञान है। आज अगर हम राधा-कृष्ण के प्रेम को अपने हृदय में उतारेंगे, तो मिठास अपने आप आएगी। सुबह की वो कतार एक सबक है – कि हम कहाँ जा रहे हैं? क्या हम त्योहारों की आत्मा को खो रहे हैं?
आप सबको होली की हार्दिक शुभकामनाएं। रंग खेलें, मिठाई खाएं, पर सबसे पहले प्रेम बांटें। यही सच्ची होली है।
✍️ लेखक: Adarsh Rao | प्रेरणा: वो सुबह 5 बजे की कतार



