Saturday, April 18, 2026

Vande Mataram Protocol: Govt Considers Making Standing Mandatory

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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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इमेज (AI जनरेटेड)। - Dainik Bhaskar

इमेज (AI जनरेटेड)।

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के लिए भी उसी तरह खड़े होना अनिवार्य हो सकता है, जैसे अभी राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समय होता है। सरकार ने वंदे मातरम की रचना के 150 साल पूरे होने के मौके पर राष्ट्रीय गीत के लिए भी प्रोटोकॉल लागू करने पर विचार कर रही है। वंदे मातरम को 1950 में राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, गृह मंत्रालय इस बात पर चर्चा कर रहा है कि क्या ‘वंदे मातरम्’ पर भी वही नियम और कायदे लागू किए जाएं, जो राष्ट्रीय गान पर लागू होते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

‘वंदे मातरम्’ एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका अर्थ है-“हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं।” यह रचना राष्ट्रवाद, देशभक्ति, आध्यात्मिकता और पहचान के भावों को एक साथ लाती है। यह एक भजन के रूप में लिखा गया था। यह बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंद मठ’ का हिस्सा है।

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।

वंदे मातरम् के लिए प्रोटोकॉल

अभी द प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर एक्ट 1971 केवल राष्ट्रीय गान पर लागू होता है। संविधान के आर्टिकल 51(ए) में भी नागरिकों से राष्ट्रीय गान का सम्मान करने की जिम्मेदारी तय की गई है। हालांकि, ‘वंदे मातरम’ के लिए लोगों के खड़े होने या इसके गायन में भाग लेने को अनिवार्य बनाने जैसी कोई कानूनी व्यवस्था फिलहाल मौजूद नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट्स में याचिकाएं दायर कर मांग की गई है कि ‘वंदे मातरम्’ पर भी राष्ट्रगान के नियम लागू किए जाएं। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये नियम केवल ‘जन गण मन’ पर लागू होते हैं, न कि ‘वंदे मातरम्’ पर।

गृह मंत्रालय के निर्देशों में राष्ट्रीय गान की अवधि और उसके गायन के दौरान किए जाने वाले आचरण का स्पष्ट उल्लेख है। इसमें सभी के लिए खड़ा होना और गायन में भाग लेना अनिवार्य बताया गया है।

कानूनी प्रावधानों के अनुसार, जो कोई राष्ट्रीय गान का अपमान करता है या दूसरों को उसका सम्मान करने से रोकता है, उसे तीन साल तक की सजा हो सकती है।

अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि क्या इसी तरह के प्रावधान ‘वंदे मातरम्’ पर भी लागू किए जा सकते हैं।

वंदे मातरम पर विवाद

पिछले साल वंदे मातरम’ पर तब विवाद पैदा हो गया जब कुछ मुस्लिम संगठनों ने राष्ट्रीय गीत के पाठ का विरोध किया था। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत मूल छह अंतरों वाले गीत को एक अंतरे का करने का आरोप लगाया था।

वर्तमान में राष्ट्रीय गीत के रूप में मूल भजन के छह अंतरों में से केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाते हैं। हटाए गए हिस्सों में दुर्गा सहित तीन हिंदू देवियों का उल्लेख है।

भाजपा ने 1937 में देश के पहले PM जवाहरलाल नेहरू के लिखे गए पत्र भी शेयर किए थे, जिनमें उन्होंने संकेत दिया था कि गीत की पृष्ठभूमि मुसलमानों को असहज कर सकती है।

इस मुद्दे पर हुई बहस के दौरान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जोर दिया था कि राष्ट्रीय गीत को भी राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज के समान दर्जा दिया जाना चाहिए।

वहीं, कांग्रेस ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय गीत पर यह जोर पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर दिया जा रहा है। ———– ये खबर भी पढ़ें:

नेहरू क्यों नहीं चाहते थे ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रगान बने:गांधी ने अल्लाहू अकबर से तुलना की; क्या इसमें मुसलमानों को मारने का आह्वान

भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् पर आज लोकसभा में 10 घंटे की बहस हो रही है। शुरुआत पीएम मोदी के भाषण से हुई। पिछले महीने मोदी ने कहा था कि 1937 में कांग्रेस ने वंदे मातरम् के टुकड़े कर दिए थे, इसी ने भारत-पाक विभाजन के बीज बोए। पढ़ें पूरी खबर…

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