Saturday, April 18, 2026

Delhi Firecracker Ban Update; Diwali 2025 Green Crackers | Supreme Court | दिल्ली-NCR में शर्तों के साथ ग्रीन पटाखे फोड़ने की इजाजत: 18 से 21 अक्टूबर तक परमिशन; CJI बोले- पर्यावरण से समझौता नहीं, बैलेंस अप्रोच अपनानी होगी

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नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखे फोड़ने की इजाजत दे दी। CJI बी आर जस्टिस गवई ने कहा कि हमें बैलेंस अप्रोच अपनाना होगा, लेकिन पर्यावरण के साथ समझौता नहीं करेंगे। हम कुछ शर्तों के साथ ग्रीन पटाखे जलाने की इजाजत दे रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, दिल्ली-NCR में 18 से 21 अक्टूबर तक ही पटाखे चलाने की परमिशन होगी। कोर्ट ने कहा कि 20 अक्टूबर को दिवाली के दिन सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात में 8 बजे से 10 बजे तक ग्रीन पटाखे फोड़ने की इजाजत होगी।

दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखे जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 5 आदेश-

1. गश्ती दल ग्रीन पटाखे बनाने वाले हर पटाखा निर्माताओं की नियमित जांच करेगा। ग्रीन पटाखों के डिब्बों पर लगे QR कोड वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे।

2. NCR क्षेत्र में बाहरी क्षेत्रों से कोई भी पटाखे लाने की अनुमति नहीं होगी।

3. अगर नकली पटाखे पाए जाते हैं, तो लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।

4. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) 18 अक्टूबर से वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) की निगरानी करेंगे और इस संबंध में रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेंगे।

5. जल का नमूना भी लिया जाएगा।

26 सितंबर: SC ने दिल्ली-NCR में पटाखे बनाने की इजाजत दी थी इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर को दिल्ली-NCR में पटाखा बनाने की इजाजत दी थी। कोर्ट ने कहा था कि जिन मैन्युफैक्चरर्स के पास ग्रीन पटाखा बनाने के लिए NEERI ((National Environmental Engineering Research Institute) और PESO ((Petroleum and Explosives Safety Organisation) का परमिट हैं, सिर्फ वे ही पटाखा बना सकते हैं।

जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक शर्त भी रखी थी। बेंच ने कहा कि वे कोर्ट के अगले आदेश तक NCR में कोई भी पटाखा नहीं बेचेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल 2025 को दिल्ली-NCR में पटाखों पर बैन सिर्फ सर्दियों के मौसम के बजाय पूरे साल तक बढ़ाने का आदेश दिया था। इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसपर अभी सुनवाई चल रही है।

12 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट बोला- सिर्फ दिल्ली-NCR क्यों, देशभर में पटाखे बैन हो

सुप्रीम कोर्ट ने 12 सितंबर को प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कहा था कि अगर दिल्ली-NCR के शहरों को साफ हवा का हक है तो दूसरे शहरों के लोगों को क्यों नहीं? CJI गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा- अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है तो पूरे देश में बैन करना चाहिए। साफ हवा का अधिकार सिर्फ दिल्ली-NCR तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि पूरे देश के नागरिकों को मिलना चाहिए।

इससे पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखा बैन मामले पर अप्रैल में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे बेहद जरूरी बताया था। कोर्ट का कहना था कि प्रतिबंध को कुछ महीनों तक सीमित करने से कोई मकसद पूरा नहीं होगा। लोग पूरे साल पटाखों को इकट्ठा करेंगे और उस समय बेचेंगे, जब बैन लगा होगा।

दिल्ली में 14 अक्टूबर को GRAP-1 लागू किया गया था

दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 पार होने के बाद 14 अक्टूबर को दिल्ली NCR में GRAP-1 लागू कर दिया गया था। इसके तहत होटलों और रेस्तरां में कोयला और जलाऊ लकड़ी के उपयोग पर बैन है। कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने एजेंसियों को पुराने पेट्रोल और डीजल गाड़ियों (बीएस -III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल) के संचालन पर सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं।

आयोग ने एजेंसियों से सड़क बनाने, रेनोवेशन प्रोजेक्ट और मेंटेनेंस एक्टिविटीज में एंटी-स्मॉग गन, पानी का छिड़काव और डस्ट रेपेलेंट तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने के लिए भी कहा है।

​​​​​​हाई लेवल से ऊपर AQI खतरा

AQI एक तरह का थर्मामीटर है। बस ये तापमान की जगह प्रदूषण मापने का काम करता है। इस पैमाने के जरिए हवा में मौजूद CO (कार्बन डाइऑक्साइड ), OZONE, (ओजोन) NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड), PM 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) और PM 10 पोल्यूटेंट्स की मात्रा चेक की जाती है और उसे शून्य से लेकर 500 तक रीडिंग में दर्शाया जाता है।

हवा में पॉल्यूटेंट्स की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, AQI का स्तर उतना ज्यादा होगा। और जितना ज्यादा AQI, उतनी खतरनाक हवा। वैसे तो 200 से 300 के बीच AQI भी खराब माना जाता है, लेकिन अभी हालात ये हैं कि राजस्थान, हरियाणा दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ये 300 के ऊपर जा चुका है। ये बढ़ता AQI सिर्फ एक नंबर नहीं है। ये आने वाली बीमारियों के खतरे का संकेत भी है।

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