AAP में खुला आंतरिक टकराव: राघव चड्ढा पर नेताओं के तीखे वार, सियासत गरमाई
By Political Desk • नई दिल्ली • अप्रैल 2026
आ म आदमी पार्टी (AAP) के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। राज्यसभा से उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा के सवालों ने पार्टी के भीतर सियासी भूचाल ला दिया है।
⚡ विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
पार्टी द्वारा उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने इस फैसले पर सवाल उठाए। इसके तुरंत बाद पार्टी के कई बड़े नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
🗣️ आतिशी का सीधा सवाल: “क्या आप मोदी से डरते हैं?”
पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने सोशल मीडिया पर चड्ढा पर तीखा हमला बोला।
“क्या आप मोदी जी से डरते हैं? जब आम आदमी LPG संकट से जूझ रहा था, तब आपने कुछ क्यों नहीं कहा?”
उन्होंने आगे कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे, जबकि चड्ढा विदेश में थे और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए थे।
⚠️ भगवंत मान का बयान: “पार्टी लाइन तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी”
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चड्ढा को हटाने के फैसले को सामान्य प्रक्रिया बताया।
- 📌 “यह पार्टी का आंतरिक फैसला है”
- 📌 “जो पार्टी लाइन के खिलाफ जाएगा, उस पर कार्रवाई तय है”
- 📌 चड्ढा को बताया “compromised”
मान ने तंज कसते हुए कहा कि जब गंभीर मुद्दे उठाने चाहिए, तब “एयरपोर्ट पर समोसे” जैसे विषय उठाना सवाल खड़े करता है।
🔥 “आप डर गए हैं” – अनुराग ढांडा का हमला
AAP नेता अनुराग ढांडा ने भी चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पिछले कुछ वर्षों से प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलने से हिचकिचा रहे हैं।
“हम केजरीवाल के सिपाही हैं, हमारी पहचान निडरता है। अगर कोई डरता है, तो वह देश के लिए कैसे लड़ेगा?”
उन्होंने आरोप लगाया कि चड्ढा ने कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया और पार्टी के विरोध प्रदर्शनों में भी सक्रिय नहीं रहे।
🏛️ विपक्षी हमला: BJP ने भी साधा निशाना
इस पूरे विवाद पर बीजेपी ने भी AAP पर हमला बोला।
बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि AAP अब “एक व्यक्ति की पार्टी” बनकर रह गई है।
“AAP अब आम आदमी की पार्टी नहीं, बल्कि सिर्फ अरविंद केजरीवाल के इर्द-गिर्द घूमती है।”
🔍 सियासी मायने क्या हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद केवल एक पद से हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के अंदर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व पर सवालों को भी उजागर करता है।
यह घटनाक्रम आने वाले चुनावों से पहले AAP के लिए चुनौती बन सकता है।
📌 निष्कर्ष
AAP के अंदर का यह टकराव अब खुलकर सामने आ चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस संकट से कैसे उबरती है।
“सियासत में असहमति नई नहीं, लेकिन जब वह सार्वजनिक हो जाए, तो उसके मायने बदल जाते हैं।”
📜 स्रोत: राजनीतिक बयान, मीडिया रिपोर्ट्स • 2026



