New Delhi: श्रद्धा वाकर हत्याकांड में सुनवाई की रफ्तार को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। श्रद्धा के मित्र रजत शुक्ला ने अदालत की कार्यवाही में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आरोपी आफताब अमीन पूनावाला के खिलाफ मुकदमे में चार साल बाद भी फैसला नहीं आना न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोपी को परीक्षा देने की अनुमति मिलने पर भी आपत्ति जताई।
रविवार को मीडिया से बातचीत में रजत शुक्ला ने कहा कि जिस व्यक्ति पर श्रद्धा की हत्या कर शव के कई टुकड़े करने का आरोप है, उसके प्रति किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी पर दया दिखानी है तो श्रद्धा के परिवार पर दिखाई जानी चाहिए, जो वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहा है।
शुक्ला ने दावा किया कि श्रद्धा वाकर का अंतिम संस्कार अब तक नहीं हो सका है क्योंकि उनके सभी अवशेष परिवार को नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले को वर्षों से पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली, जिसके कारण पीड़ित परिवार आज भी मानसिक पीड़ा झेल रहा है।
उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतने संवेदनशील मामले में सुनवाई तेजी से पूरी होनी चाहिए थी। उनका कहना था कि गंभीर मामलों में समय पर न्याय मिलना बेहद जरूरी है, क्योंकि देरी से समाज में गलत संदेश जाता है और अपराधियों का मनोबल बढ़ सकता है।
हाल ही में साकेत कोर्ट ने 20 जुलाई की निर्धारित सुनवाई स्थगित कर दी थी, क्योंकि आरोपी आफताब अमीन पूनावाला ने बताया था कि उसी दिन वह तिहाड़ जेल स्थित IGNOU परीक्षा केंद्र में एमए (Sociology) की परीक्षा देगा। इसके बाद इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर भी बहस तेज हो गई।
आफताब अमीन पूनावाला पर आरोप है कि उसने मई 2022 में अपनी लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वाकर की हत्या कर शव के कई टुकड़े किए और उन्हें दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में ठिकाने लगाया। यह मामला नवंबर 2022 में सामने आया था, जब श्रद्धा के परिवार ने उससे संपर्क न होने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। श्रद्धा के पिता विकास वाकर का वर्ष 2025 में निधन हो गया था।
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