“दूसरे देश भी करते हैं”: E20 पेट्रोल पर सरकार के दावे को केजरीवाल ने बताया अधूरा सच
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के इस दावे को चुनौती दी है कि भारत E20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल लागू करने वाला अकेला देश नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह तर्क अधूरी जानकारी पर आधारित है, क्योंकि ज़्यादातर देशों में अभी भी E10 या उससे कम इथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल ही इस्तेमाल हो रहा है।
जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस, थाईलैंड में अब भी E10 तक ही सीमित
Kejriwal के अनुसार जर्मनी, अमेरिका और फ्रांस में अधिकतम E10 पेट्रोल का इस्तेमाल होता है। थाईलैंड ने 2008 में पहली बार E20 को ट्रायल आधार पर पेश किया था, लेकिन 16 साल बाद आज भी वहां उपभोक्ताओं को E10 और E20 — दोनों में से चुनने का विकल्प मिलता है।

जापान का उदाहरण: 15 साल का ट्रांजिशन प्लान
उन्होंने बताया कि जापान अभी E3 स्तर पर है और 2030 तक E10 तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि E20 तक पहुंचने के लिए जापान ने 2040 तक यानी करीब 15 साल का फेज़-आउट पीरियड तय किया है।
ब्राज़ील में ट्रांजिशन में लगे 50 साल
केजरीवाल ने ब्राज़ील का हवाला देते हुए कहा कि वहां आज फ्लेक्सी-फ्यूल वाहन E30 से लेकर E100 तक इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इस बदलाव की शुरुआत 1931 में E5 से हुई थी। 1975 से 1985 के बीच ब्राज़ील ने अपने वाहनों को आक्रामक तरीके से इस मिश्रण के अनुकूल बनाया, और पूरा ट्रांजिशन पूरा होने में करीब 50 साल का समय लगा।
भारत में सिर्फ 3 साल में देशव्यापी लागू
इसके उलट, केजरीवाल ने बताया कि भारत में 6 फरवरी 2023 को केवल 1,900 पेट्रोल पंपों पर ट्रायल आधार पर E20 शुरू किया गया था, और महज तीन साल बाद, 1 अप्रैल 2026 तक इसे देशभर के करीब 90,000 पेट्रोल पंपों पर अनिवार्य कर दिया गया। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी देश ने इतनी तेज़ी से यह बदलाव लागू नहीं किया, जबकि अन्य देशों ने इसके लिए 10 से 50 साल तक का समय लिया।
करोड़ों वाहन असंगत होने का दावा
केजरीवाल ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि देश में करीब 22 करोड़ टू-व्हीलर और 8 करोड़ कारें E20-कम्पैटिबल नहीं हैं, जिससे कुल मिलाकर करीब 3 करोड़ वाहन प्रभावित होने का खतरा है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि हर पेट्रोल पंप पर E5, E10 और E20 — तीनों विकल्प उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उपभोक्ता अपनी जेब और अपने वाहन की क्षमता के अनुसार चुनाव कर सकें।
नोट: यह खबर अरविंद केजरीवाल के एक सार्वजनिक बयान/वीडियो पर आधारित है। तथ्यों की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से की जानी चाहिए।
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