Saturday, April 18, 2026

Aurangzeb – Former Mughal Emperor

Must Read

औरंगजेब: मुगल सम्राट

By Explore Historical Events

औरंगजेब (३ नवंबर १६१८ – ३ मार्च १७०७) मुगल साम्राज्य का छठा शासक था, जिसने १६५८ से १७०७ तक शासन किया। उसका शासनकाल भारतीय इतिहास का सबसे लंबा और सबसे विवादास्पद दौर माना जाता है। उसने साम्राज्य को सबसे विशाल बनाया, लेकिन अपनी धार्मिक नीतियों और युद्धों के कारण वह आज भी बहस का केंद्र है।

प्रारंभिक जीवन और जन्म (गुजरात)

Dahod, Gujarat in the year 1618Aurangzeb - Former Mughal Emperor #Aurangzeb

औरंगजेब का जन्म ३ नवंबर १६१८ को गुजरात के दाहोद (अब दाहोद जिला) में हुआ था। उसके पिता शाहजहाँ (तब शहजादे खुर्रम) और माता मुमताज महल थीं। बचपन में उसे मुहिउद्दीन नाम दिया गया। वह शाहजहाँ का तीसरा पुत्र था। बाल्यकाल से ही वह कट्टर मुसलमान था और उसने कुरान की शिक्षा ली।

१६३६ में उसे दक्कन का सूबेदार नियुक्त किया गया, जहाँ उसने प्रशासनिक और सैन्य कौशल दिखाया। उसने खानदेश और बीजापुर की सीमा पर किलों की मरम्मत करवाई और मराठा सरदारों से संबंध बनाए।

 

सत्ता संघर्ष और राज्याभिषेक

Mughal Emperor Aurangzeb coronation after power struggle – Indian history scene #Aurangzeb

१६५७ में शाहजहाँ की बीमारी के बाद उत्तराधिकार का युद्ध शुरू हुआ। औरंगजेब ने अपने भाइयों दारा शिकोह, शुजा और मुराद बख्श से संघर्ष किया। धर्मत (१६५८), समुगढ़ (१६५८) और देवराई (१६५९) के युद्धों में उसने दारा शिकोह को हराया। दारा को बंदी बनाकर मार डाला गया, शुजा बर्मा भागा और मुराद बख्श को फाँसी दी गई। पिता शाहजहाँ को आगरा के किले में नजरबंद कर दिया और ३१ जुलाई १६५८ को औरंगजेब ने स्वयं को बादशाह घोषित किया। उसने “आलमगीर” (विश्व विजेता) की उपाधि धारण की।

साम्राज्य का विस्तार

दक्कन अभियान

औरंगजेब ने उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में तंजौर तक, पूर्व में चटगाँव से पश्चिम में हिंदुकुश तक साम्राज्य फैलाया। उसने असम (अहोम राज्य) पर आक्रमण किया, लेकिन १६७१ में सराईघाट के युद्ध में लचित बोड़फुकन ने उसे करारी शिकस्त दी। फिर भी कुछ इलाके मुगलों के अधीन रहे।

दक्कन की सल्तनतों को खत्म करना उसकी महत्वाकांक्षा थी। १६८६ में बीजापुर की आदिलशाही और १६८७ में गोलकुंडा की कुतुबशाही का अंत कर दक्कन पर पूरा कब्जा किया। लेकिन मराठों से २७ वर्षों तक युद्ध चला, जिसने साम्राज्य की आर्थिक और सैन्य शक्ति को खोखला कर दिया।

 

धार्मिक नीतियाँ

मंदिर विध्वंस

औरंगजेब ने १६६९ में जजिया कर पुनः लगाया और हिन्दुओं पर कई प्रतिबंध लगाए। उसके फरमानों से हज़ारों मंदिर तोड़े गए, जिनमें काशी विश्वनाथ (वाराणसी) और केशवदेव (मथुरा) के मंदिर प्रमुख हैं। इनके स्थान पर मस्जिदें (ज्ञानवापी, शाही ईदगाह) बनवाई गईं। उसने गोरक्षकों पर प्रतिबंध, हिन्दू त्योहारों पर रोक और मंदिर निर्माण पर पाबंदी लगाई। इन नीतियों ने उसे भारतीय इतिहास में सबसे विवादास्पद शासक बना दिया।

भारतीय वीरों से संघर्ष

🚩 छत्रपति शिवाजी महाराज

शिवाजी महाराज

१६५९ में अफजल खान को मारकर शिवाजी ने मराठा स्वराज्य की नींव रखी। औरंगजेब ने उसे कुचलने के लिए कई सेनाएँ भेजीं, लेकिन हर बार हार का सामना करना पड़ा। १६६६ में आगरा दरबार में शिवाजी को कैद करने का प्रयास किया, लेकिन वे नाटकीय ढंग से भाग निकले। १६७४ में शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ। शिवाजी की मृत्यु १६८० में हुई, तब औरंगजेब ने कहा, “अब हिन्दुस्तान में चैन मिलेगा।”

 

🔥 छत्रपति संभाजी महाराज

संभाजी महाराज

शिवाजी के पुत्र संभाजी ने मराठा सेना का नेतृत्व किया। १६८९ में मुगलों ने उन्हें धोखे से पकड़ लिया। औरंगजेब ने उन्हें ४० दिनों तक यातनाएँ दीं और अंततः टुकड़े-टुकड़े कर मार डाला। उनकी वीरता और दृढ़ता अद्वितीय थी।

 

🛐 गुरु तेग बहादुर

गुरु तेग बहादुर

कश्मीरी पंडितों पर जबरन धर्मांतरण का दबाव बनाने पर गुरु तेग बहादुर ने आवाज उठाई। औरंगजेब ने उन्हें १६७५ में दिल्ली बुलाकर इस्लाम कबूलने से इनकार करने पर सूली पर चढ़वा दिया। यह शहादत सिख इतिहास की अमर गाथा है।

 

🤺 वीर दुर्गादास राठौड़

दुर्गादास राठौड़

जोधपुर के राजा जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद औरंगजेब ने मारवाड़ पर कब्जा करना चाहा। दुर्गादास राठौड़ ने राजकुमार अजीत सिंह की रक्षा की और २५ वर्षों तक मुगलों से गुरिल्ला युद्ध लड़ा। अंततः १७०८ में अजीत सिंह को जोधपुर की गद्दी दिलाई।

 

🐘 लचित बोड़फुकन

लचित बोड़फुकन

१६७१ में सराईघाट के युद्ध में अहोम सेनापति लचित बोड़फुकन ने मुगल सेना को बुरी तरह हराया। औरंगजेब की असम विजय की महत्वाकांक्षा हमेशा के लिए रुक गई।

 

अंतिम दिन और मृत्यु

औरंगजेब की कब्र

लगातार युद्धों और विद्रोहों से थककर औरंगजेब ने अपने अंतिम दिन अहमदनगर (दौलताबाद) के पास बिताए। ३ मार्च १७०७ को ८८ वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हुई। उसकी इच्छा के अनुसार उसे खुले आसमान के नीचे, खुल्लाबाद (औरंगाबाद) में दफनाया गया। उसकी कब्र पर कोई भव्य मकबरा नहीं बना, केवल एक साधारण संगमरमर की चौकी है।

“मैं अकेला आया था और एक अजनबी की तरह जा रहा हूँ। मुझे नहीं पता मैं कौन हूँ, न ही कहाँ जा रहा हूँ।”
— औरंगजेब का अंतिम पत्र

विरासत

औरंगजेब का शासन मुगल साम्राज्य के चरमोत्कर्ष और पतन की शुरुआत दोनों का प्रतीक है। क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा साम्राज्य देने वाला यह बादशाह अपनी धार्मिक कट्टरता, लंबे युद्धों और नीतियों के कारण इतिहास में सबसे विवादास्पद शासक बना। आज भी उसकी छवि एक कुशल प्रशासक और निर्मम धर्मांध — दोनों रूपों में देखी जाती है। उसके शासन ने भारत के सामाजिक-धार्मिक ताने-बाने पर अमिट छाप छोड़ी।


स्टेफनी हॉर्निल स्मिथ के लेख पर आधारित • हिंदी रूपांतर • पूर्ण ऐतिहासिक विवरण

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
Latest News

8th Pay Commission: ₹32,400 to nearly ₹69,000 basic pay? Fitment factor for govt salary hike decoded

Set up by Prime Minister Narendra Modi last year, the 8th Pay Commission is set to make key...
- Advertisement -spot_img

More Articles Like This

- Advertisement -spot_img